ज़िंदगी का दस्तूर

Published by

on

Tried writing a few lines in Hindi after ages… hope these words resonate with you all.

दस्तूर है ज़िंदगी का,
कुछ लोग सिर्फ आँसू देकर चले जाते हैं,
और वो ज़ख्म जब टूटे दिल पे
नासूर बनके छा जाते हैं,
तब एक फ़रिश्ता कहीं
कोई ऐसा भी मिल जाता है।

जो बिना गुरूर के, यूँ ही प्यार से,
ज़ख्मों पे मरहम ही नहीं लगाता,
अपितु दामन खुशियों से भर देता है।

पर यही तो खूबसूरत सच्चाई है ज़िंदगी की,
ईश्वर से मुआवज़े में कभी गलती नहीं होती साहब,
किसी का लूटा हुआ प्यार,
कहीं और से लौटा जाता है।

 

Leave a Reply

Discover more from Affinity and Moods

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading